9/11 हमला:- AMERICA को जख्म, WAR ON TEROR...एजेंसियों की नाकामी से साजिश तक की कहानी

9/11 हमला:- AMERICA को जख्म, WAR ON TEROR...एजेंसियों की नाकामी से साजिश तक की कहानी


September 9/11 attacks anniversary: इस हमले के गुनहगार ओसामा बिन लादेन को  AMERICA  ने उसके अंजाम तक भी पहुंचा दिया है लेकिन दर्द और सवाल हैं कि आज भी  हरे हैं. आज भी इस हमले को लेकर साजिशों की नई-नई कहानी सामने आती रहती हैं. (C I A) ने क्यों FBI को जानकारी नहीं दी थी, ये भी सवाल है. साथ ही इजरायल के रोल को लेकर भी कई कहानियां हैं 

9/11 वो तारीख, जिसने दुनिया का इतिहास बदल दिया. मुट्ठीभर आतंकवादियों ने सदी के सबसे ताकतवर मुल्क के सीने पर चढ़कर कोहराम की दास्तान लिखी. ऐसी दर्दनाक दास्तान कि आज 20 साल बाद भी उसके दिए जख्मों की शिनाख्त हो रही है.

हमले के गुनहगार अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने उसके अंजाम तक भी पहुंचा दिया है लेकिन दर्द और सवाल हैं कि आज भी हरे हैं.


आज भी सवाल उठते हैं कि क्या ये हमला अमेरिकी खुफिया एजेंसियों FBI तथा CIA की आपसी रस्साकशी के चलते हुआ? आज भी सवाल उठते हैं कि क्या ये हमला तत्कालीन बुश प्रशासन की नाकामी थी? आज भी सवाल उठते हैं कि बाहर से आए 19 आतंकवादियों ने कैसे AMERICA में घुसकर, उसके ही चार विमानों को हाईजैक कर दुनिया की सबसे सुरक्षित गगनचुंबी इमारतों को ध्वस्त कर कर दिया

और भी कई सवाल हैं, साजिशों को लेकर भी दुनियाभर में चर्चा हुई है और उनके जवाब भी वक्त के साथ साथ आते रहे हैं. बहरहाल, अब आपको बताते हैं कि साल 2001 में 11 सितंबर 9/11 Attack को ये हमला कैसे हुआ, हमले के बाद आतंकवाद पर कैसे चोट की गई और क्या वॉर ऑन टेरर  का मकसद पूरा हो गया. 


11 सितंबर 2001


अमेरिका के न्यूयॉर्क में सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टॉवर पर AMERICAN AIRLIENCE का विमान टकराया. इसके ठीक 16 मिनट बाद 9 बजकर 2 मिनट पर WORLD TRADE CENTER के साउथ टॉवर पर UNITED AIRLIENCE का विमान टकराया. इस तरह दो विमानों के  टकराने के बाद WORLD TRADE CENTER  की आसमान छूती इमारत जमींदोज हो गई. टीवी और रेडियो पर इन तबाही की तस्वीरों को प्रसारित किया ही जा रहा था कि 9 बजकर 37 मिनट पर अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट77 ने वर्जीनिया में पेंटागन को निशाना बनाया. और 10 बजकर 3 मिनट पर यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 पेंसिल्वेनिया के शंक्सविले में एकखेत में जाकर गिरी

इस तरह अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार विमानों को हाईजैक कर AMERICA को दहला दिया. इन आत्मघाती हमलावरों ने करीब 3000 लोगों की जान ले ली और खुद भी राख हो गए. इनमें से 17 आतंकी वो थे, जिनका वास्ता अलग-अलग खाड़ी देशों से था. इनमें से ज्यादातर ऐसे थे जिन्हें इंग्लिश तक नहीं बोलनी आती थी.

 

HOW TO ATTECK



संयुक्त राज्य अमरीकाकी पत्रिका यूएसए टुडे   ने अमेरिकन  जांच एजेंसी एफबीआई  की रिपोर्ट के आधार पर अपनी रिपोर्ट में हमले से जुड़ी कई अहम जानकारियां लिखी हैं. इस रिपोर्ट में बताया कि हानी हंजूर और नवफ अल-हाजमी नाम के दो आतंकी हमले से काफी पहले ही अमेरिका पहुंच गए थे. ये न्यूजर्सी में आम जिंदगी जी रहे थे. 
हंजूर ने यहां प्लेन भी किराये पर लिये और उड़ाने की प्रैक्टिस की. एक बार वो प्लेन उड़ाता हुआ हुडसन नदी और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से भी गुजरा. जबकि अल-हाजमी वेन से लगातार कार किराये पर लेता था 

इन दोनों आतंकियों ने किसी भी फेक आईडी का इस्तेमाल नहीं किया. न ही ये लोग अंडरग्राउंड रहे, बल्कि अमेरिका में एक आम शहरी की तरह ही रहते रहे. ये दोनों ही नहीं, सभी 19 आतंकी प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन के साथ अमेरिका में दाखिल हुए थे. उनके वीजा भी वैध थे. 

हालांकि, इन आतंकियों को मोहम्मद अता लीड कर रहा था लेकिन इनमें से दो आतंकी ऐसे भी थे जो अमेरिकी एजेंसी के रडार पर थे. CIA को पता था कि अल-हाजमी और खालिद अल-मिदहार अलकायदा के ऑपरेटिव्स हैं. C.I.A  ने इन दोनों को मिडल ईस्ट से मलेशिया और मलेशिया से थाईलैंड और वहां से लॉस एंजिल्स तक ट्र्रैक किया. लेकिन CIA ने इसकी जानकारी एफबीआई को नहीं दी. ऐसा तब किया गया जबकि अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन की धमकी का भी सबको अंदाजा था. अमेरिकी एजेंसियों को ये भी पता था कि मलेशिया में 5 जनवरी 2000 को हुई मीटिंग में हमले का मंसूबा बनाया गया

FBI के कई स्पेशल एजेंट्स आज भी सवाल उठाते हैं कि आखिर सीआईए ने एफबीआई से वो जानकारी साझा क्यों नहीं की. काउंटर टेरर स्पेशलिस्ट और FBI के पूर्व स्पेशल एजेंट मार्क रोसिनी भी उनमें से एक हैं. USA TODAY को दिए गये हाल के एक INTERVIEW में मार्क ने बताया कि जब वो CIA के साथ मिलकर काम कर रहे थे तब अल-आजमी औरअल-मिहदार के बारे में साल 2000 की शुरुआत में ही जानकारी मिल गई थी. उन्होंने सीआईए से कहा कि ये जानकारी एफबीआई को दे दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और मार्क से खामोश रहने के लिए कहा गया. 

CIA ने क्यों नहीं शेयर की जानकारी?

CIA ने इस जानकारी को टॉप सीक्रेट बनाकर अपने पास ही रखा और FBI से साझा नहीं किया. MARK ROSINI ने बताया , ''CIA के ऑफिसर ने उन्हें कहा था कि अल-आजमी औरअल-मिदहार का आना अमेरिका पर हमले का संकेत नहीं है, बल्कि ये डायवर्ट करने के लिए किया गया है. [C.I.A] को यकीन था कि अलकायदा अगला हमला SOUTH EAST ASIA में CIA की मंशा ये भी थी कि इन दोनों के जरिए अलकायदा के नेटवर्क का पता लगाया जाए.'' मगर, ये दांव उल्टा पड़ गया हालांकि, C.I.A ने हमले से कुछ हफ्ते पहले इन दोनों आतंकियों की जानकारी F.B.I को दी भी, लेकिन तब तक शायद काफी देर हो चुकी थी. 

FBI के पूर्व स्पेशल एजेंट अली एच. सुफान भी 9/11 अटैक को एजेंसियों की नाकामी मानते हैं. अली ने एक इंटरव्यू ने दौरान बताया है कि जिस वक्त ये हमला हुआ तब वो यमन में थे और उन्होंने जैसे ही ये खबर सुनी उन्हें यकीन था कि ये अलकायदा ने ही किया है. अली ने बताया कि अगर समय पर हमारे साथ वो इनपुट साझा किया गया होता तो हालात कुछ और ही होते. 


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